मेरी कविता 3690
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मेरी कविता की बेटी के साथ मेरे रिश्ते I मेरे घर कविता अपने पति और बेटी के साथ आई Iउनकी बेटी भी अब १६ साल की हो चुकी थी I वह बिलकुल उन्ही की तरह थी I मैंने उसे अपनी गोद में उठा लिया I उसे चूमा I उसे कपड़े दिलाने ले गया दूकान पे I एक अच्छी सी SKIRT दिलाई और टॉप दिलाई I एक बार फिर जब वह बारिश में काफी शाम को कार से उधर से जा रही थी तो उसने सोंचा होगा की अंकल से मिलते चले I वह आई और मैंने उसे रुकने को कहा कि इस मौसम में रुक जाये और मम्मी को फ़ोन कर दे I उसने फ़ोन करा I खाना खाने के बाद हम ऊपर वाले कमरे में चले गए I हल्की लाइट में मैं उसे देखता रहा I उसने पूछा कि आप मुझे क्यों इतना मानते हैं? मैंने कहा कि मैं उसकी मम्मी को प्यार करता था,लेकिन वह मेरी नहीं हो सकीं I अब मैं आपमें ही अपनी कविता कि छवि देखता हूँ I मुझे यह चेहरा बहुत अच्छा लगता है I आई लव यू my लव ! मैंने उसे अपनी बाहों में ले लिया I मैंने कहा आओ तुम्हे अपनी कहानी सुनाये,और उसी पलंग पर लेट गए I उसने कहानी सुनते सुनते मेरा हाथ पकड़ लिया I कहा आप कितने अच्छे हैं I कैसे बिताया मम्मी के बिना I फिर वो करवट हो गयी और मेरा हाथ अपने ऊपर रख लिया I मैं उसे धीरे से पकड़ लिया I अब उसका पिछवाडा मेरी तरफ था I मैंने अपनी जान को कस लिया I वह भी मेरे पक्ष में थीं I उसने डोरी खोली और UNDERWEAR नीचे खिसका दिया I मैंने निरोध् लगायी और उनकी गांड में डाल के तेजी से उन्हें कस लिया I हम दोनों को मजा आ रहा था I उनके चूचियों को दबाया,सहलाया,उन्हें चुम्मा लिया I उनकी बुर में डाला I उन्हें धीरे धीरे चोदा I फिर लिप क़िस लिया I फिर वह मेरे ऊपर हो गयीं I काफी देर बाद मैंने फिर उनकी गांड में डाली और कस लिया I करीब १ घंटे बाद हम सो गए I


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