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mujheaurmattadpaoraja
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हाई दोस्तों,

मेरा नाम उतकरष हे और मैं पंजाब का रहने वाला हूँ | एक दिन ग्रहसे निकला ऑफिस के लिए तो मुझे रस्ते में एक आंटी मिली जिनकी उम्र करीब ४० के आस पास होगी, उनके पास एक बैग था जिसे वो ठीक से उठा नही पा रही थी | मेने उनसे वो बैग लेके बस स्टॉप तक पंहुचा दिया और फिर बस आने के बाद हम दोनों उसमे चड पड़े | हम दोनों साथ मैं बैठ थे और बात करते करते जा रहे थे | उन्होंने बताया की उनके पती आरमी में हे और उनकी एक बेटी हे | उनका स्टॉप मेरे स्टॉप से थोडा पहले पड़ता था, वो दिखने में मस्त थी और उनका फिगर भी कमाल का था | मेने उन्हें कहा की आप चाहो तो में आपके घर तक बैग रख देता हूँ काफी भारी हे इसीलिए | वो बोली ठीक हे और फिर में उनके चुचो की तरफ देक्खने लग गया, और उन्होंने मुझे पकड़ लिया पर कुछ नही बोली और वो मेरे खड़े लंड की तरफ देखने लग गयी | मैं समझ गया की उनके मन में क्या हे |

उनका स्टॉप आया और वो उतर गयी और में भी उतर गया और फिर उनके घर तक पहुच गए | मैं अंदर जाके सोफे पे बैठ गया और वो मेरे लिए पानी लाने गयी | आके जब दे रही थी तो वो झुकी और मुझे उनके गोरे चुचो के दर्शन हो गए जिससे मेरा लंड फिरसे तन गया | वो सामने बैठ गयी और बातें करने लगी, मेने उनसे पुचा की अंकल साल में एक दो बार आतें होगे तो आपको ठीक से प्यार भी नही कर पाते होंगे फिर आप कैसे रह लेती हो | वो बोली क्या करे खुद की प्यास खुद ही बुझाने पडती हे और फिर वो उठ के जाने लगी और रोने लग गयी | मेने मोका देख के उनको पीछे से पकड़ लिया और अपनी तरफ घुमा के किस करने लग गया, पहले वो मुझसे बहुत छूटने की कोशिश की पर मेने उनको नही छोड़ा और उन्हें किस करता रह गया | पाँच मिनट बाद वो भी मेरा साथ देने लग गयी | हम दोनों फिर उनके कमरे में चले गए और फिर वह पुरे नंगे हो गए |

मेने उन्हें बिस्तर पे लेटा दिया और उनके उपर चड के उनके होठो को कस कस के चूसने लगा और एक हाथ से उनके मम्मे दबाने लग गया और वो एक हाथ से मेरे लंड को मसलने लग गयी | मुझे उस वक्त काफी मजा आ रहा था, मैं फिर उनके निप्पल को कस कस के चूसने लग गया और वो तडप उठी और अपने आप को बिस्तर से रगड़ने लग गयी | में उनके एक निप्पल को चुस्त तो दूसरे को कस कस के मसलता रहता और इतने में वो झड गयी | मेने उन्हें अपने लंड चूसने को कहा तो वो मना कर दी | मेने फिर उन्हें कुछ नही कहा और उनके टांगो को उठा के उनकी चुत चाटने लग गया तो एक दम जोर से कराहने लग गयी और मेरे सर को पकड़ के अपने चुत में दबाने लग गयी | मेने उनके चुत को एक दम चाट चाट के साफ़ कर दिया और फिर उनके टांगो को दोनों तरफ खोल के अपने लंड को रगड़ने लग गया तो वो गिडगिडाने लग गयी की प्लीज़ मुझे मेरे पती की तरह मत तड़पाओ जल्दी से करदो में और नही रुक सकती |

मेने उनके आँखों में आंसू देखा और मेरे दिल पिघल गया और फिर मेने उनकी चुत के अंदर लंड पेलना शुरू कर दिया और लंड अंदर घुसा ही था की वो चिल्लाने लग गयी | उनकी चुत एक दम कसी हुई थी, मैं उन्हें जादा दर्द नही देना चाहता था इसीलिए कस के दे दिया और मेरा लंड उनके चुत को चीरता हुआ घुस गया | घुसने के बाद उन्होंने कहें की सांस ली और फिर मेने अपनी गति बड़ा दी और कस कस के पेलना शुरू कर दिया | वो एक दम कस कस के कराहने लग गयी और हर धक्के पे अह्हह्ह आअई एस हम्म्म्म किये जा रही थी | करीब बीस मिनट के बाद हम दोनों एक साथ झड गए और फिर मैं उनके उपर लेटा रह गया | पाँच मिनट के बाद जब मेरी आँख खुली तो मेने देखा की वो मुझे चूम रही थी | फिर वो मुझे बोली अब से तुम हर रोज आया करो दोपहर के तिन बजे से पहले, उसके बाद मेरी बेटी आ जाती हे इसीलिए | फिर मैं चला गया और दूसरे दिन फिर आ गया उनके घर में |

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